प्राचार्य
कहते हैं कि जिंदगी जब इम्तिहान लेती है तो उसका कोई पाठ्यक्रम नहीं होता और जिंदगी कोई अमीर खुसरो वाला दरिया भी नहीं है कि जो डूबा सो पार। यहां हर दम चुनौतियों से जूझना भी है तो उनके पार पाकर जिंदगी के हर लम्हे को शिद्दत से जीना भी है और जिंदगी के इसी मैदान में उतारने के लिए जांबाज नागरिकों को तैयार करने का जिम्मा हम सबके कंधो पर है, जिसके लिए हम अनवरत कार्यरत हैं ताकि हम हर एक बच्चे के सर्वांगीण विकास को पुख़्ता कर उसे एक बेहतरीन इंसान के रूप में इस समाज को सौंप सकें जहां वो इस समाज को एक बेहतरीन दिशा के जानिब ले जाने का काम कर वासुदेव कुटुंबकम का हमारा विचार चरितार्थ करे, जिसके लिए फिर हम भी बोल सकें कि,
अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त,
हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त !
रोहिताश राजपाल घिंटाला